कारोबारी स्वार्थ > देश और धर्म??

विश्व भर के समाज में 5% जनता opinion maker होती है और बाकी सब उनका अनुसरण करते हैं। इन 5% में से एक बहुत ही छोटा तबका राजनेता, राजनयिक और बाबू होते हैं और बाकी इनके द्वारा बनाये गए सिस्टम से फलने फूलने वाले। ऊपर वाला तबका इन 5% को नियंत्रित करता है और ये 5% बाकी 95% जनता को।
भारत में इन 5% लोगों में अधिकांश व्यापारी, वित्त क्षेत्र से जुड़े, विनिर्माण, रोज़गार देने वाले या बिचौलिया होते हैं।

*3 प्रदेशों में भाजपा की हार का कारण*

व्यापारी (5%) वर्ग में से कईओं का मोदी के ख़िलाफ़ हो जाना, क्योंकि…. 
*Demonetisation* और *GST*

मोदी जी ने अपने समग्र अनुभव से इस बात का अंदाज़ा लगा लिया था की काले धन पे रोकथाम के बिना नीचे वर्ग (95%) के जीवन में कोई बदलाव लाना लगभग नामुमकिन है। वह विकास की राजनीति करना चाहते थे और बिना काले धन पे रोक लगाए यह असंभव था।
पैसा जब तक फॉर्मल बैंकिंग व्यवस्था में नहीं लौटता और टैक्स व्यवस्था सदृढ़ नहीं होती, जब तक ना तो आपका अर्थव्यवस्था पे कंट्रोल रहेगा और ना ही आप पैसा देश के विकास कार्यों पे खर्च कर पाएंगे। अमीर, गरीब, मध्यम का भेद कभी समझ नहीं आएगा। पता नहीं चलेगा की कौनसी स्कीम किसको लाभ पहुंचा रही है। कौन बिचौलिया है कौन असली हक़दार।
तो आपने सबसे पहले जम के गरीबों के बैंक एकाउंट खुलवाए और सारा पैसा demonetization से बैंकिंग सिस्टम में रखवा लिया। GST द्वारा एक बेहद कसा हुआ और कंट्रोल्ड टैक्स सिस्टम स्थापित कर दिया।

व्यापारी वर्ग का मानना है की धन को काला कहना गलत है। उन्होंने यह धन अपनी मेहनत से एक भ्र्रष्ट सिस्टम को धता बताकर कमाया है। उन्होंने टैक्स से अधिक राशि, अफसरों, पुलिसवालों और राजनेताओं को खिलाने में दी है, फिर यह धन काला कैसे?

असली बात यह है की व्यापारी वर्ग की बात व्यवहारिक है पर सत्य नहीं है। यह वर्ग सरकारी सिस्टम में छेद करना जानता है। यह वही मानसिकता है जो किसी ऐसी व्यवस्था को भी गाली निकालती है जो भ्रष्ट नहीं है।

मोदी जी ने demonetisation किया, आप उसे अव्यवहारिक कह सकते थे पर गलत कैसे?? आप अपने पैसे बैंक में जमा कर देते, है ना?? पर नहीं, आप कैसे जमा कराएंगे, आप तो लाखों के व्यापार में एक कौड़ी भर टैक्स नहीं देते, बैंक को क्या बताते? आपने जो पैसा बैंकिंग सिस्टम से बाहर ‘कच्चे’ में 12 टके पे चला रखा था, वो बैंक में कैसे आएगा? आपने देनदार आपके कच्चे के पैसे देने से मुकर गए, आपको कह दिया की सूद भूल जाओ, अब जब कोई बढ़िया सरकार आएगी तब फिर से कैश व्यवस्था लौटेगी और आपको आपके असल लौटा देंगे, है ना? यही कहा है ना? और पहले की तरह आप दो चार मिलके बाहुबली से उगाई भी नहीं करवा पा रहे क्योंकि बाहुबली किस पार्टी के हैं??
GST में अधिकांश चीजें ऑनलाइन हैं। पूरे भारत में अब एक जैसी कर प्रणाली है। ऐसी व्यवस्था का विरोध क्यों?

तो यह सब हुई समझ बात। पर मेरा मानना है की हम कुछ न कुछ कह के Demonetisation/GST को तो गलत बता सकते हैं, पर खुद से अपनी आत्मा से कैसे झूठ बोल सकते हैं? हम अकेले में यह कैसे कह सकते हैं की धन काला नहीं था और मोदी जी ने कुछ गलत किया था?

फिर यही बात हम पिछले 2 साल से हर गरीब, मजदूर और कारीगर तबके को कह रहे हैं।

क्या यह अत्यधिक स्वार्थ का परिचायक नहीं है? माना आपको शार्ट टर्म नुकसान हुआ पर क्या एक फॉर्मल व्यवस्था में काम करना आपके व्यवसाय और इस देश के लिए फायदेमंद नहीं होगा? क्या उस गरीब को, अपने ड्राइवर को, अपने फैक्ट्री के वर्कर को, अपने सब्ज़ी वाले, गॉर्ड, घर के नौकर, बिजलीवाले वाले को, मोदी के ख़िलाफ़ भड़का कर आप उनके साथ धोखा नहीं कर रहे? वह तबका जिसे मोदी सरकार से गैस, रहने की व्यवस्था, स्वास्थ्य बीमा, बिजली, पानी इत्यादि मिली, क्या आपको नहीं लगता की इन्हें बरगला के आप पुनः इन्हें मायूसी, मजबूरी और गरीबी में धकेल रहे हैं? क्या इनकी गलती है की अपने फैसलों के लिए ये आज भी आपपे निर्भर हैं? क्या गोवर्धन परिक्रमा, वैष्णो माता, केदारनाथ के दर्शन और शिवजी को जल चढ़ाने से आपके पाप धूल जाएंगे?

Demonitisation/GST के अनेकानेक फायदे हैं, इसकी वजह से…

  1. बिचौलिओं में सख्त मार पड़ी है। काला बाज़ारी में हर लेनदेन के क्रम पे एक बिचौलिया पैसा बनाता है, क्योंकि एक साधारण व्यक्ति कैश को आसानी से नहीं छुपा सकता।
  2. Online लेनदेन से आज हर व्यक्ति व्यापार शुरू कर सकता है। पहले की तरह कोई विशिष्ट समाज से जुड़े लोग ही नहीं, कोई भी। थोड़े रुपये का समान खरीदिये, ऑनलाइन कुछ हज़ार रुपये में अपनी पहचान बनाइये और व्यापार शुरू। GST के बाद कई प्रदेशों में एक साथ व्यापार करिए, बिना किसी झंझट के।
  3. कैश को रोकने के फायदे अब कम होते जा रहे हैं। इससे लोग अब ज्यादा खर्च करने लग गए हैं। जितना खर्च बढ़ेगा, उतनी अर्थव्यवस्था भागेगी और भाग भी रही है। GST में टैक्स बेनिफिट की चेन के चलते हर लेनदेन पे स्वतः ही GST मांगा जा रहा है। इससे चक्रवर्ती टैक्स क्रमवतार टैक्स बन गया है और माल सीधे ग्राहक तक पहुंचाने में फायदा है।
  4. टैक्स चोरी बेहद मुश्किल हो गयी है। बैंकिंग/GST सिस्टम में एक बार पैसा और लेनदेन, भले ही काला क्यों न हो, आ गया तो टैक्स की भरपाई अवश्य होगी।
  5. बैंकों में पैसे की वजह से लोन रेट अत्यधिक सस्ती होती जा रही हैं। सरकार मुद्रा जैसे कार्यक्रम चला पा रही है। होम लोन भी उल्टी दर पे आ गया है।
  6. Asset, वो चाहे मकान हो या दुकान, उनकी कीमत टूटी है क्योंकि अब कॅश में 70% तक कीमत नहीं चुकानी पड़ रही। एक तरफ होम लोन सस्ता दूसरी तरफ होम भी सस्ता।
  7. UPI, Paytm जैसी व्यवस्था होने से कोई लेनदेन कॅश के अभाव में रुक नहीं रहा। टैक्स क्रमवार ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से दिया जा सकता है।
  8. कॅश को छुपाने के चलते कच्चे का प्रयोग, हवाला माध्यम, फसलों का शार्ट, महँगा सोना, मकान, कमिटी आदि का प्रचलन कम हो रहा है। GST में सभी लेनदेन ऑनलाइन है। सॉफ्टवेयर में, cloud में डालें और निश्चिन्त रहें।
  9. भविष्य में नो कॅश, ऑनलाइन इकॉनमी आपके व्यापार को चहुँ तरफा पहुंचा सकती है। Paytm, Zomato, Oyo आदि इसका उदाहरण है। यह दूसरे देशों में अपनी ब्रांच खोल रहे हैं।
  10. GST से हर प्रदेश अब एक स्तर पे उत्पादन और खनन और संसाधन के फायदे ले सकता है।
  11. GST के चलते टैक्स में आधारभूत बदलाव राष्ट्रीय स्तर पे संभव हैं। पहले की तरह हर प्रदेश में बदलाव की आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा भी हज़ारों फायदे हैं। विकाशील और विकसित देशों में यही फर्क है।

क्या यह वर्ग मोदी को हराकर अपने कुछ निजी शार्ट टर्म फायदे के लिए फिर से देश और गरीबों का सौदा नहीं कर रहा? हमनें इतिहास में जम के जयचंद और मीर जाफ़र को गाली निकाली है, किन्तु कभी सोचा है की हमारे आज में और उनमें क्या फर्क था? हम उसी स्वार्थ के जेल में क़ैद हैं जहां हम सिर्फ दरबान बदलना चाहते हैं। हम अपने थोड़े फायदे के चलते शायद अपनी अगली पीढ़ी की भी नहीं सोच रहे। हमारे पुरखे 7 पुश्तों की सोचती थी और हम अगले 10 साल की भी नहीं सोच पा रहे।

अरे जब देश नहीं रहेगा, धर्म नहीं रहेगा तो कौनसा पैसा किसके लिए पैसा?
2014 में आप मोदी को इसलिए जीताना चाहते थे की बदलाव होगा, और अब हो रहा है तो इसलिए हराना चाहते हो की बदलाव नहीं चाहिए?? ऐसे रीढ़विहीन लोगों और समाज की कोई चिंता नहीं करता मित्रों।
एक राक्षस देश को खा रहा था और आपको भी कुछ गिरे टुकड़े मिल रहे थे <– इस दृश्य को एक बार सोचिये। क्या आप यह चाहते हैं फिर से??

आप लोगों के कुतर्क हैं की ज़मीन पे कुछ नहीं बदला, सब कुछ वैसा ही है। क्या आप सच में ऐसा मानते हैं?…..

{यह लिंक दे रहा हूँ, पढ़े लिखे हो तो पढ़ लेना| 
https://48months.mygov.in/ }

……और अगर मानते हैं तो फिर उन्हीं लोगों को वापस ले आएंगे जो आपके वर्ग को खुली छूट देखे रखते थे चाहे फिर वह खुद देश और आपके धर्म के साथ कुछ भी करें??

किस मुंह से हम मोदी की किसी और पार्टी से तुलना कर रहे हैं? हमारा दिल नहीं जानता की PM का सिर्फ खुद भ्रष्ठ ना होना ही भारत देश में कितनी बड़ी बात है? क्या ये हर बात में मूर्खों वाले तर्क, अम्बानी, माल्या, अडानी, चोकसी, नीरव इत्यादि?? हमारा दिल नहीं जानता की यह सब किसके उठाये हुए हैं? क्या हम अपने झूठ और देशद्रोह को सच और सही मान बैठे हैं? ऐसे कुतर्क करके आप खुद को समाज का अग्र और पढ़ा लिखा भाग समझते हैं?

वाजपेयी जी की हार पे घड़याली आँसूं निकालने वाले मित्रों, याद रखना, मोदी आपकी अंतिम उम्मीद है।

हमारे और हमारे अंत के बीच, सिर्फ मोदी जी खड़े हैं। अपने दम्भ और स्वार्थ में यह भूल मत जाना। अगली बार आँसू पोंछने भी कोई नहीं आएगा।

~विमं